पवित्र दाँत अवशेष मंदिर
वह मंदिर जहाँ बुद्ध का दाँत रखा गया है — श्रीलंका का सबसे पवित्र तीर्थस्थल और वह स्थान, जो 16 शताब्दियों से सत्ता की वैधता तय करता आ रहा है। कैंडी (Kandy) स्थित श्री दलदा मालिगावा (Sri Dalada Maligawa) केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सिंहली पहचान का प्रतीक, तीर्थयात्रा का केंद्र और यूनेस्को (UNESCO) की सूची में शामिल एक स्थापत्य परिसर है।
पवित्र अवशेष
किंवदंती के अनुसार, यह दाँत 543 ईसा पूर्व में बुद्ध की चिता से निकाला गया था। चौथी शताब्दी में राजकुमारी हेममाला (Hemamala) इसे अपने केशों में छिपाकर श्रीलंका लेकर आईं। तब से यह दाँत द्वीप का तावीज़ बना हुआ है: जो इस दाँत का स्वामी होता है, वही देश पर राज करता है।
मंदिर परिसर
सफेद दीवारें, लाल छतें, लकड़ी पर नक्काशी और चारों ओर खाई — यही कैंडियन शैली है। मुख्य मंदिर दो मंज़िला है: दाँत ऊपरी मंज़िल पर, सात एक के भीतर एक रखी पेटियों के पीछे एक स्वर्ण स्तूप में सुरक्षित है। तीर्थयात्री दाँत को स्वयं नहीं देख पाते — केवल स्वर्ण दागोबा के दर्शन करते हैं।
पूजा
दिन में तीन बार (लगभग 5:30, 9:30 और 18:30 बजे) पूजा समारोह होता है। गर्भगृह के द्वार खुलते हैं, ढोल और बाँसुरी बजते हैं, और तीर्थयात्री कमल के फूल अर्पित करते हैं। पूजा से 30-40 मिनट पहले पहुँचें।
एसला परहेरा
साल में एक बार (जुलाई-अगस्त में) एक भव्य उत्सव होता है: 10 रातों तक हाथियों, नर्तकों और ढोल वादकों की शोभायात्राएँ निकलती हैं। यह एशिया का सबसे बड़ा बौद्ध उत्सव है।
व्यावहारिक जानकारी
टिकट लगभग 2000 रुपये का है। खुलने का समय 5:30 से 20:00 बजे तक। यहाँ सख्त वेशभूषा नियम हैं: सफेद या हल्के रंग के कपड़े, ढके हुए कंधे और घुटने, और जूते उतारकर प्रवेश। 1998 के हमले के बाद से प्रवेश पर कड़ी जाँच होती है।
कैंडी
यह मंदिर कैंडी शहर के केंद्र में है, जो सिंहली राजाओं की अंतिम राजधानी थी। मंदिर के सामने झील और चारों ओर की पहाड़ियाँ — यह शहर एक पूरे दिन के योग्य है।