जोगेसा मंदिर
सियोल के बिलकुल हृदय में, गगनचुंबी इमारतों और शॉपिंग सेंटरों से कुछ ही मिनटों की दूरी पर, चोगेसा मंदिर (Jogyesa Temple) खड़ा है — कोरियाई बौद्ध धर्म का आध्यात्मिक केंद्र। जब आप द्वार से होकर रंग-बिरंगी लालटेनों से सजे आँगन में पहुँचते हैं, तो शहर का शोर मानो थम जाता है। यह वह जगह है जहाँ आप ठहर सकते हैं, धूप-अगरबत्ती की सुगंध में साँस ले सकते हैं और एक पल के लिए 1600 साल से भी पुरानी परंपरा को छू सकते हैं।
मंदिर का इतिहास
बौद्ध धर्म चौथी शताब्दी में कोरिया पहुँचा और एक हज़ार साल से भी अधिक समय तक राजधर्म बना रहा। लेकिन चोसोन राजवंश (1392-1910) के दौरान कन्फ्यूशियसवाद ने बौद्ध धर्म को शहरों से बाहर कर दिया। आधुनिक चोगेसा मंदिर की स्थापना 1910 में हुई और यह कोरिया में बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान का केंद्र बन गया।
क्या देखें
मुख्य देउंगजेओन हॉल (Daeungjeon) मंदिर का केंद्र है, जहाँ भगवान शाक्यमुनि बुद्ध की सुनहरी प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के सामने 500 साल पुराना सफेद चीड़ का पेड़ है — जो बौद्ध धर्म में एक पवित्र वृक्ष माना जाता है। रंग-बिरंगी कागज़ की लालटेनें चोगेसा की पहचान हैं, जो बुद्ध जयंती के दिन विशेष रूप से सुंदर लगती हैं।
मंदिर के कार्यक्रम
मंदिर एक 'टेम्पलस्टे' (Templestay) कार्यक्रम प्रदान करता है — जो कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक का हो सकता है। यहाँ आप ध्यान सीख सकते हैं, सुबह की प्रार्थना सभा में भाग ले सकते हैं और मंदिर का शाकाहारी भोजन चख सकते हैं।
व्यावहारिक सुझाव
मंदिर प्रतिदिन सुबह जल्दी से लेकर शाम तक खुला रहता है, प्रवेश निःशुल्क है। निकटतम मेट्रो स्टेशन — Anguk (लाइन 3) या Jonggak (लाइन 1)। घूमने का सबसे अच्छा समय बुद्ध जयंती (अप्रैल-मई) है, जब पूरा मंदिर हज़ारों लालटेनों से सजाया जाता है।