अयुत्थाया ऐतिहासिक पार्क
अयुत्थया (Ayutthaya) — सियाम की प्राचीन राजधानी के खंडहर हैं, जो बैंकॉक से एक घंटे की दूरी पर स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। कभी दुनिया का सबसे बड़ा शहर, जिसे 1767 में बर्मियों ने नष्ट कर दिया था, आज यह अपने मंदिरों के विशाल पैमाने और एक बीते युग के वातावरण से लोगों को चकित कर देता है।
राज्य का इतिहास
अयुत्थया की स्थापना 1350 में हुई थी और चार शताब्दियों तक यह एक समृद्ध राज्य की राजधानी रही। अपने चरम पर यहाँ दस लाख लोग रहते थे — उस समय के लंदन या पेरिस से भी अधिक। 33 राजाओं ने इस शहर से शासन किया, जब तक कि बर्मी सेना ने इसे ज़मीन में नहीं मिला दिया।
विनाश
1767 में बर्मियों ने शहर को जला दिया, बुद्ध की मूर्तियों के सिर काट दिए और निवासियों को गुलाम बनाकर ले गए। राजधानी थोनबुरी (Thonburi) और फिर बैंकॉक चली गई। बीसवीं सदी में पुनर्स्थापना शुरू होने तक ये खंडहर जंगलों में पड़े रहे।
प्रमुख मंदिर

वाट महाथात (Wat Mahathat) — पेड़ की जड़ों में लिपटा हुआ बुद्ध का प्रसिद्ध सिर। वाट फ्रा सी सानफेट (Wat Phra Si Sanphet) — शाही महल के परिसर में तीन स्तूप। वाट रत्चाबुराना (Wat Ratchaburana) — एक स्तूप जिसके भीतर भित्तिचित्र और खज़ाने हैं। वाट चाइवात्थानाराम (Wat Chaiwatthanaram) — नदी के किनारे स्थित एक फोटोजेनिक मंदिर।
जड़ों में सिर
अयुत्थया की सबसे प्रसिद्ध छवि है वाट महाथात में अंजीर के पेड़ में समाता हुआ बुद्ध का सिर। यह वहाँ कैसे पहुँचा, यह एक रहस्य बना हुआ है। फोटो खिंचवाते समय सम्मान के प्रतीक के रूप में सिर के नीचे झुककर बैठें। पहरेदार इसका पालन करवाते हैं।
घूमने का तरीका
मंदिर नदियों से बने एक द्वीप पर बिखरे हुए हैं। घूमने का सबसे अच्छा तरीका साइकिल है, जिसका किराया स्टेशन के पास मिलता है। टुक-टुक और नदी पर चलने वाली लॉन्गटेल नावें इसके विकल्प हैं। प्रमुख मंदिर देखने में 4-5 घंटे लगते हैं।
कैसे पहुँचें
बैंकॉक से — हुआ लम्फोंग (Hua Lamphong) स्टेशन से ट्रेन (1.5 घंटे, सुंदर दृश्य) या विक्ट्री मॉन्युमेंट (Victory Monument) से मिनीवैन (1 घंटा)। बैंकॉक से एक दिवसीय टूर लोकप्रिय हैं, जिन्हें अक्सर बांग पा-इन (Bang Pa-In) ग्रीष्मकालीन महल के साथ जोड़ा जाता है।
वातावरण और विशेषताएँ
अयुत्थया बैंकॉक से की जाने वाली एक अवश्य देखने योग्य यात्रा है। खंडहरों का पैमाना चकित करता है, और इतिहास मन को छू लेता है। सुबह जल्दी या सूर्यास्त के समय आएँ — कम गर्मी और कम पर्यटक होंगे। टोपी और पानी अनिवार्य हैं। सुखोथाई के मंदिर पुराने हैं, पर अयुत्थया अधिक सुलभ है।